Sunday, November 07, 2010

पहचान कौन चित्र पहेली :- ३ का उत्तर

                    माफ़ कीजियेगा, आज मैं दिन में इतना व्यस्त था कि इसका हिंट भी प्रकाशित नहीं कर पाया | और इसके उत्तर पढ़कर परेशान हो रहा था | सभी इसे  llama बता रहे थे | हालाँकि सब इसके काफी करीब थे लेकिन सही उत्तर केवल ३ लोगों ने दिया | हालाँकि  पं० डी० के० शर्मा 'वत्स' जी ने भी सही उत्तर दिया लेकिन वो निश्चित समय सीमा के बाद मिला मुझे |
                    सही जवाब है alpaca | समय के अभाव में यहाँ पूरी जानकारी नहीं दे पा रहा हूँ | इसके बारे में विस्तृत जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते हैं |
                     और अब समय है विजेता का नाम बताने का |
आज की इस चित्र पहेली के विजेता हैं समीर जी |( १०० अंक )
और उनके बाद सही उत्तर दिया आशीष मिश्रा जी ने | ( ९९ अंक )
और सबसे आखिरी में सही उत्तर दिया इन्द्रनील जी ने | ( ९८ अंक )

                 आप सभी लोगों को बधाई | और जो सही उत्तर ना दे सके उन्हें अगली बार के लिए शुभकामनाएं | तो अगले रविवार फिर मिलेंगे एक नयी पहेली के साथ |

पहचान कौन चित्र पहेली :-३

                 पिछले रविवार विश्वनाथ जी ने चित्र पहेली का नाम सुझाया था....चलिए उसी नाम से अब हर रविवार सुबह ७ बजे यह चित्र पहेली प्रकाशित की जाएगी | पहेली का जवाब शाम ७ बजे तक आप दे सकते हैं | और इसके उत्तर और विजेता का नाम रात ९ बजे घोषित किया जायेगा | 
                 इस बार बात करते हैं जानवरों की | जरा पहचानिए तो यह कौन सा जानवर है | जो लोग discoveryचैनल देखते हैं वो तो झट से पहचान जायेंगे | चलिए ट्राई कीजिये | शाम ४ बजे एक हिंट भी प्रकाशित किया जायेगा लेकिन उसके बाद मिलने वाले उत्तर को १० नंबर कम मिलेंगे |

  

Friday, November 05, 2010

आज कुछ और नहीं, बस आपको और आपके परिवार को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं..(अरे कम से कम शुभ दीपावली तो कहते जाईये.. )

         आज कुछ ख़ास नहीं है लिखने के लिए, समय का भी अभाव है |  बस एक बात कहनी थी, दीपावली रौशनी का त्यौहार है, आवाज़ का नहीं.... इसलिए पटाखों को ना कहें बस रौशनी फैलाएं.... रौशनी अपने घर में, समाज में, अपने देश में.....
          उज्जवल करें अपने मन को, अपने मष्तिष्क को और अपनी आत्मा को.....आपको और आपके परिवार को मेरे और मेरे परिवार की तरफ दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं..

Thursday, November 04, 2010

सुनहरी यादें :-3

            समय और रचनाओं के अभाव में मुझे अपना ब्लॉग सुनहरी यादें कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ा लेकिन सुनहरी यादों के झरोखे से पुरानी रचनायें यहाँ हर शुक्रवार सुबह प्रकाशित की जाएँगी...
            आज की सुनहरी यादों में रचना है संगीता स्वरुप जी की और इसे भेजा है अनुपमा पाठक जी ने... इसे उन्होंने प्रकाशित किया था २४ दिसम्बर २००८ को और इसमें नीले आसमान का ख़ूबसूरत वर्णन है...
             तो इस सप्ताह की हमारी सर्वश्रेष्ठ पाठिका है अनुपमा पाठक और उनकी भेजी और संगीता जी की रचना का शीर्षक है  |
                                                                    ===नीला आसमान=== 

मैं -
आसमान हूँ ,
एक ऐसा आसमान
जहाँ बहुत से
बादल आ कर
इकट्ठे हो गए हैं
छा गई है बदली
और
आसमान का रंग
काला पड़ गया है।
ये बदली हैं
तनाव की , चिंता की
उकताहट और चिडचिडाहट की
बस इंतज़ार है कि
एक गर्जना हो
उन्माद की
और -
ये सारे बादल
छंट जाएँ
जब बरस जायेंगे
ये सब तो
तुम पाओगे
एक स्वच्छ , चमकता हुआ
नीला आसमान.
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  इसी तरह दूसरों की पुरानी रचनायें भेजते रहें....  पता है  sunhariyadein@yahoo.com

      PS :- अगर आपने यह पोस्ट नहीं पढ़ी है तो कृपया टिप्पणी देने का कष्ट भी ना करें |  

Monday, November 01, 2010

कभी-कभी...

कभी-कभी मैं
लेकर पंछियों से पंख
नीले गगन में विचरता हूँ
यूँ ही
शायद तलाश है किसी चीज की

हाथ में एक हाथ लेकर
आसमां की खाक छानता हूँ
उसे ढूँढता हूँ जो
ज़मीं पे मिलना कठिन हो चला है,

मगर खाली हाथ लौट आता हूँ
और वो हाथ भी छूट जाता है,

फिर कभी कभी
ज़मीं पे बसी दुनिया में
करता हूँ प्रयत्न
वो करने का
जो आसमान में होता है,

तभी एक नश्तर सा चुभता है
और थक कर गिर जाता हूँ

फिर उठता हूँ और
चल पड़ता हूँ आसमां की सैर पर 

बस यूँ ही कभी कभी ||
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