Friday, September 11, 2020

फकैती वाले दिन...

मुझे ये चाँद बेचना है,
पर सारे खरीददार मुझे
बिखरे हुए प्रेमी लगते हैं,  
चाँद खरीदना उनका अधूरा सा ख्वाब है 
जो वो खुद को बेचकर 
पूरा करना चाहते हैं... 

मैं ढूँढ रहा हूँ कब से 
कि मिले कोई 
जिसे रहा हो 
इस चाँद से सच्चा प्रेम... 

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मैं कविताएं लिखना चाहता हूँ 
तुम्हारी भाषा में,
वो भाषा जिसका अनुवाद
बस हम दोनों के पास है,

ये जो बेवजह 
मेरी नज़्मों का किनारा खो गया 
उसे अपनी मुस्कुराहटों की भाषा में 
इठलाते हुए पढ़ लेना... 

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मैं फिर से लापरवाह हो जाना चाहता हूँ 
कुछ भी लिखते वक़्त,
लगता है 
लबालब भर गया हूँ शब्दों से,

मुझे धकेलना है इन शब्दों को 
किसी कूड़ेदान में 
और हो जाना है  
बिलकुल खाली... 

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एक चिंगारी है
मेरे तलवे के नीचे,
वो सिगरेट जो फेक दी किसी ने
आखिरी कश लेने से पहले,

मेरे पास माचिस भी है
और पानी भी  
मैं बुझता भी हूँ तो 
आखिर फिर से जलने के लिए.... 

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Monday, August 10, 2020

Wonder... A Wonderful film....

कहते हैं फिल्म समाज का आईना होती हैं...

पर सवाल है किस समाज का, पृथ्वी पर करोड़ों तरह के समाज हैं, सबकी मान्यताएं अलग-अलग हैं... हम अपने आस-पास के समाज को तो जानते ही हैं, और अधिकतर लोग उसी को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं..

मैं हमेशा से ऐसी फिल्में देखना पसंद करता हूँ जो ऐसे समाज से अवगत कराती हों, मैं जिसका हिस्सा नहीं हूँ... कॉलेज के वक़्त ईरानी, पर्शियन, कोरियन ये सारी फिल्में देखीं, कुछ एक तो बिना Subtitles के भी...

कई सारी फिल्मों को देखते हुए जाना कि हम एक भारतीय के तौर पर जिन संस्कार और संस्कृति की बात करते हैं वो कमोबेश बाकी देशों में भी ऐसे ही हैं, कुछ-एक जगह शायद हमसे बेहतर भी... खैर सर्वश्रेष्ठ कहलाने की इस लालसा के बारे में फिर कभी...

आज बात एक फिल्म की, "Wonder"...

ये फिल्म है एक बच्चे की(Auggie) जो Treacher Collins syndrome से जूझ रहा है और लोगों की घूरती नज़रों से बचना चाहता है, ये फिल्म है उसके माता-पिता की जो उसे सामान्य ज़िन्दगी और सामान्य समाज का हिस्सा बनाना चाहते हैं, ये फिल्म उसकी बड़ी बहन की भी है जो ये जानती है कि उसके भाई को, उसके पेरेंट्स की ज्यादा अटेंशन चाहिए... फिर भी वो उन्हें मिस करती है कि काश वो उससे भी उतनी ही बातें करें जितना वो उसके भाई से करते हैं...

ये फिल्म है एक और लड़के की जो उसका दोस्त नहीं बनना चाहता, फिर बनना चाहता है लेकिन बाकी दोस्त क्या कहेंगे उससे भी डरता है...

ये फिल्म एक लम्बी लड़ाई है सभी किरदारों के लिए, लड़ाई किसी "एबनॉर्मल" से इंसान को "So called Normal" समाज का हिस्सा बनाने के लिए...

हम खुद इंसान हैं लेकिन इंसानी रिश्तों को समझना और उसे फिल्मों में उतारना शायद उतना मज़बूत Genre नहीं है... लेकिन इसपर जितनी फिल्में बनी हैं वो सभी कुछ न कुछ सिखाती ही हैं...

फिल्म के आखिरी में Auggie कहता है.... "Be kind, for everyone is fighting a hard battle. And if you really want to see what people are, all you have to do is look".

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फिल्म कहाँ देखें... अगर आपके पास एयरटेल मोबाइल कनेक्शन है तो https://www.airtelxstream.in/movies पर लॉगिन करके.. 

Wednesday, July 22, 2020

मैं यहीं हूँ, कहाँ जाऊँगा,

मैं यहीं हूँ
कहाँ जाऊँगा, 
एक प्रेमपत्र हूँ 
उड़ता हुआ सा
आँधियों में, 
ग़र बारिश हुई 
यहीं गिरकर
भींग जाऊँगा... 

मैं यहीं हूँ 
कहाँ जाऊँगा... 

हर्फ़ हूँ मैं 
आख़िरी ही सही, 
हर सफ़हे पर
नज़र आऊँगा 
मैं यहीं हूँ 
कहाँ जाऊँगा... 

लाख ठोकरें 
हज़ार पत्थर 
दुत्कार दिया जाऊँगा, 
पर बदहवास प्रेम हूँ 
कहीं न कहीं 
ज़हन में रह ही जाऊँगा... 

मैं यहीं हूँ 
कहाँ जाऊँगा...

Monday, July 20, 2020

बैठे-ठाले...

"बेहतर ज़िन्दगी क्या है.... "
"जो हम जी रहे हैं वही सबसे बेहतर है... "
"तो क्या हमें संतुष्ट हो जाना चाहिए ??"
"नहीं, हमें इसे बेहतर बनाना है, लेकिन अगर मुश्किल आये तो इसका मतलब ये नहीं कि उदास होकर बैठ जाएँ..."
"लोगों को मूड स्विंग क्यों होते हैं, और उसे क्यों नहीं होता था...."
"हर इंसान अलग होता है, कुछ लोगों को हर ३ दिन में हो जाता है और किसी को 7 साल में एक बार भी नहीं... "
"हम्म्म, पता है दिक्कत क्या है... दिक्कत ये है कि ये मूड स्विंग की ढाल लेकर हम उन लोगों को हर्ट कर देते हैं, जिनसे बात करके मूड सही होना चाहिए... "
"कुछ इंसान कितने अजीब होते हैं न, ज़िन्दगी का क्या दुःख नहीं देखा उसने, पर एक अजीब सा सुकून रहता है उसके चेहरे पर... एकदम शांत, एकदम निर्मल... कोई शिकायत नहीं, कोई उदासी नहीं, जैसे ज़िन्दगी को उसी तरह जीना जैसे-जैसे ज़िन्दगी के सफ़हे खुलते हों... "
"पता है बमुश्किल 23 की होगी वो जब मैं उससे मिला...  कोई इतनी कम उम्र में इतना mature कैसे हो सकता है लेकिन... "
"कितनी आसानी से उसने हर चीज को हैंडल किया, कैरियर, फैमिली, प्रेम... सब कुछ... "
"काश !! मैं भी उतना ही mature होता उस वक़्त..."
"पता है, इन दिनों मैं उस जैसा होना चाहता हूँ... "
"वैसा इंसान मुझे शायद फिर कभी न मिले... उसने कितना कुछ सिखाया मुझे..."
"हर कोई कुछ-न-कुछ सिखा के ही तो जाता है... "
"आज कल मुझे बहुत हंसी आती है पता है, लगता है कुछ चीजें कुछ लोग टीनएज में ही सीख जाते और कुछ लोग बुढ़ापे तक भी नहीं... "
"जो जितनी जल्दी ज़िन्दगी में जितना कुछ देखता है, वो उतनी जल्दी सीखता है..."
"बिना दुनिया देखे, बिना हज़ार तरह के लोगों से मिले कोई क्या ही सीखेगा... "
"कुछ लोग सीखना भी तो नहीं चाहते... ज्ञान बोलकर मज़ाक उड़ा देते हैं... "

Monday, July 06, 2020

One more year and another shade of life...

बचपन में जन्मदिन मनाने का कोई ख़ास दिल नहीं किया, मेरे घर पर कभी किसी का जन्मदिन मना नहीं और न ही कभी किसी को कोई खास फर्क पड़ा... 


पहला जन्मदिन मना 2001 में, कोई केक वगैरह नहीं बस चिप्स और मैगी की पार्टी.. कुछ ख़ास दोस्तों को मेरे जन्मदिन में इंटरेस्ट आने लग गया था और शायद मुझे भी... अच्छा लगने लगा था लोगों का विश करना, लगता था पूरी साल में ये एक दिन सिर्फ मेरा है... 2003 का जन्मदिन भी ख़ास था बहुत, पहला केक और लाइफ का पहला सरप्राइज... 

खैर कई सारे जन्मदिन यूँ ही गुज़रे, कभी न कभी किसी न किसी ने ख़ास बना ही दिया है इस दिन को... 
बहुत कुछ लिखना चाहता हूँ, जैसे हर एक जन्मदिन से जुडी याद... लेकिन समझ नहीं आ रहा क्या लिखूं, कैसे लिखूं... 

Lockdown में अकेले बैठे बैठे मन उचटता सा जाता है... लगता है ऐसे में अगर पूरा ही अकेले होता तो क्या होता, पर अक्सर ज़िन्दगी से हम कुछ ज्यादा ही शिकायतें कर बैठते हैं, कहीं न कहीं ज़िन्दगी की झोली में खुशियों के सिक्के होते ही हैं, बस उन्हें खोजने की ज़रुरत है... कम से कम मोबाइल पर ही सही, लोग जुड़े तो हैं... 


और आखिर गुल्लक है ज़िन्दगी, उससे वही निकलेगा जो हम उसमे डालेंगे...

समंदर की बहुत याद आ रही, शाम को सूरज को देखने का दिल कर रहा है, उस शान्ति में बैठे बस वो लहरों की आवाज़ सुननी है... 

ज़िन्दगी की कई तहरीरें होती हैं, कुछ समझ में आती हैं कुछ नहीं... पर हमेशा की ही तरह, शुक्रिया ज़िन्दगी....

I am thankful of everything whatever life has given to me, I am still the same Guy with dreams in his eyes and wonder in the heart and no situations can take these away from me.....
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