Thursday, November 04, 2010

सुनहरी यादें :-3

            समय और रचनाओं के अभाव में मुझे अपना ब्लॉग सुनहरी यादें कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ा लेकिन सुनहरी यादों के झरोखे से पुरानी रचनायें यहाँ हर शुक्रवार सुबह प्रकाशित की जाएँगी...
            आज की सुनहरी यादों में रचना है संगीता स्वरुप जी की और इसे भेजा है अनुपमा पाठक जी ने... इसे उन्होंने प्रकाशित किया था २४ दिसम्बर २००८ को और इसमें नीले आसमान का ख़ूबसूरत वर्णन है...
             तो इस सप्ताह की हमारी सर्वश्रेष्ठ पाठिका है अनुपमा पाठक और उनकी भेजी और संगीता जी की रचना का शीर्षक है  |
                                                                    ===नीला आसमान=== 

मैं -
आसमान हूँ ,
एक ऐसा आसमान
जहाँ बहुत से
बादल आ कर
इकट्ठे हो गए हैं
छा गई है बदली
और
आसमान का रंग
काला पड़ गया है।
ये बदली हैं
तनाव की , चिंता की
उकताहट और चिडचिडाहट की
बस इंतज़ार है कि
एक गर्जना हो
उन्माद की
और -
ये सारे बादल
छंट जाएँ
जब बरस जायेंगे
ये सब तो
तुम पाओगे
एक स्वच्छ , चमकता हुआ
नीला आसमान.
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  इसी तरह दूसरों की पुरानी रचनायें भेजते रहें....  पता है  sunhariyadein@yahoo.com

      PS :- अगर आपने यह पोस्ट नहीं पढ़ी है तो कृपया टिप्पणी देने का कष्ट भी ना करें |  

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